अहमदाबाद के पश्चिमी क्षेत्र स्थित साबरमती वार्ड में अवैध निर्माण का मामला अब केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहा। यह मुद्दा अब राजनीतिक संरक्षण, एएमसी की कार्यप्रणाली और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की भूमिका पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, यदि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होती है, तो बीजेपी के कई स्थानीय नेताओं पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि साबरमती क्षेत्र में
बिना अनुमति बहुमंजिला निर्माण
नियमों को ताक पर रखकर दुकानें और मकान
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण
सूत्रों का दावा: बीजेपी नेताओं का कथित संरक्षण
सूत्रों के अनुसार, अवैध निर्माण कराने वाले व्यक्तियों के बीजेपी के स्थानीय नेताओं से घनिष्ठ संबंध बताए जा रहे हैं। यही कारण माना जा रहा है कि
पहले दर्ज कराई गई शिकायतें
जनप्रतिनिधियों तक पहुंचने के बावजूद
आगे कार्रवाई के बिना बंद कर दी गईं।
नोटिस चिपकाने तक सीमित एएमसी
स्थानीय लोगों का कहना है कि
निर्माण कार्य बदस्तूर जारी रहता है
किसी भी इमारत को वास्तव में गिराया नहीं जाता
इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या एएमसी अधिकारी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं?
गरीबों पर बुलडोज़र, रसूखदारों पर रहम
आरोप है कि
गरीबों के घर तुरंत तोड़ दिए जाते हैं
रेहड़ी-पटरी वालों को हटाने में एएमसी तत्पर रहती है
लेकिन बीजेपी से जुड़े कथित रसूखदारों के अवैध निर्माण को वर्षों से नजरअंदाज किया जा रहा है
क्या यही कानून का दोहरा चेहरा है?
जांच से डर क्यों?
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि
अगर सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो
स्वतंत्र जांच से डर क्यों?
सूत्रों का दावा है कि जांच शुरू होते ही
कई बीजेपी नेताओं की भूमिका
कुछ एएमसी अधिकारियों की मिलीभगत
और अवैध निर्माण से जुड़ा पूरा नेटवर्क
सामने आ सकता है।
बीजेपी के लिए बन सकता है बड़ा संकट
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला
आगामी चुनावों में
बीजेपी की स्थानीय छवि पर
गहरा असर डाल सकता है।
यदि उच्चस्तरीय जांच हुई, तो
बीजेपी के कई नेता कानूनी घेरे में आ सकते हैं — ऐसी चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।
जनता की मांग: निष्पक्ष कार्रवाई
साबरमती क्षेत्र की जनता मांग कर रही है कि
अवैध निर्माण पर तुरंत बुलडोज़र चले
राजनीतिक पहचान देखे बिना कार्रवाई हो
दोषी एएमसी अधिकारियों को निलंबित किया जाए
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि
क्या प्रशासन और बीजेपी नेतृत्व इस मामले में ईमानदार कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा?
अगली रिपोर्ट में अवैध निर्माण से जुड़े
नेताओं के नाम
अधिकारियों की भूमिका
और राजनीतिक संरक्षण की पूरी परत
उजागर की जाएगी।
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